कोटली मार्ग पर डंगा गिरने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

भाजपा नेत्री अनुपमा सिंह ने लगाए गंभीर आरोप, कहा- कार्रवाई नहीं हुई तो शुरू करेंगे जन आंदोलन
मंडी।
मंडी-कोटली मार्ग के निर्माण कार्य को लेकर सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं भाजपा नेत्री अनुपमा सिंह ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मंडी में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि मार्ग के निर्माण में लगातार अनियमितताएं बरती जा रही हैं और कार्य निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका ताजा उदाहरण बीते रोज सामने आया, जब करीब 50 फुट लंबा और लाखों रुपये की लागत से निर्मित डंगा अचानक गिर गया। गनीमत रही कि हादसे में किसी तरह का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सरकारी धन का नुकसान हुआ है।
अनुपमा सिंह ने आरोप लगाया कि डंगा गिरने की घटना निर्माण कार्य में कथित खामियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वह इससे पहले भी मंडी-कोटली मार्ग के निर्माण की गुणवत्ता का मामला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष उठा चुकी हैं। उस समय निर्माण कार्य में सुधार का आश्वासन मिला था, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
उन्होंने निर्माण कार्य कर रही कंपनी को लेकर भी सवाल उठाए। अनुपमा ने दावा किया कि संबंधित कंपनी को लेकर अदालत की ओर से ब्लैक लिस्ट किए जाने की बात सामने आई है, इसके बावजूद इसी मार्ग का कार्य उससे करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी को निर्माण कार्य से बाहर नहीं किया गया और गुणवत्ता के मानकों के अनुसार काम नहीं करवाया गया तो वह जन आंदोलन शुरू करेंगी।
उन्होंने बताया कि मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र भेजा गया है। अब दोबारा पत्र भेजकर पूरे मामले से अवगत करवाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से डंगा गिरने की घटना सहित पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वह मामले को दोबारा अदालत के समक्ष ले जाएंगी। साथ ही निर्माण कंपनी को किए जा रहे भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए जाएंगे।

अनुपमा सिंह ने कहा कि केंद्रीय टीमें समय-समय पर मंडी-कोटली मार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने आती हैं। निरीक्षण के बाद रिपोर्ट भी तैयार होती है, लेकिन इन रिपोर्टों को सार्वजनिक नहीं किया जाता। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय टीमों द्वारा किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों के सामने निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

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