बोले राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया संकट पर पहले ही दी थी केंद्र को चेतावनी,
मंडी। भारतीय रुपये में कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने के बीच हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने केंद्र सरकार से आम जनता, किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग पर बढ़ रहे आर्थिक दबाव को कम करने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विकास कपूर ने कहा कि हालिया आर्थिक परिस्थितियां देश के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। एक अक्टूबर को रुपया 96.31 रुपये प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ, जबकि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों के दबाव का भी रुपये पर असर देखा गया।
कपूर ने कहा कि अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान देश का राजकोषीय घाटा करीब 7.1 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लक्ष्य का 41.9 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, रुपये की स्थिति, रोजगार और आम परिवारों की क्रय शक्ति पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने राहुल गांधी के मई 2026 में दिए गए उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया संकट और तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के बीच भारत के सामने आने वाले आर्थिक संकट की चेतावनी दी थी। राहुल गांधी ने 19 मई को रायबरेली में भारत के सामने “economic storm” आने की बात कही थी और किसानों, युवाओं तथा छोटे कारोबारियों पर इसके संभावित असर का मुद्दा उठाया था।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण आम जनता को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र से घरेलू मांग, रोजगार, छोटे व्यापार और आम परिवारों की क्रय शक्ति मजबूत करने के साथ आर्थिक एवं वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
हालांकि, केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोलियम आपूर्ति को लेकर देश में पर्याप्त भंडार और आपूर्ति व्यवस्था होने की बात कही थी। मई में सरकार ने बताया था कि भारत के पास करीब 60 दिन का कच्चा तेल भंडार उपलब्ध था और ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे थे।
