जलवायु अनुकूल कृषि, स्वस्थ पशुधन और सतत विकास पर मंथन
रूप लाल कौंडल
मंडी : अभिलाषी विश्वविद्यालय, चैलचौक (मंडी) में तीन दिवसीय द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “एग्रीवेट-2026” (AGRI-VET 2026) का शुभारंभ विश्विद्यालय के सभागार में आयोजित किया गया। इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर, हेल्दी लाइवस्टॉक और सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ (जलवायु अनुकूल कृषि, स्वस्थ पशुधन और सतत विकास) रखा गया है। सम्मेलन के पहले ही दिन देश-विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विषय विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों सहित 570 से अधिक प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. हंसराज खन्ना (संयुक्त आयुक्त, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार), विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक प्रो. एच. के. चौधरी, ‘साहस’ (SAAHAS) संस्था के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार तथा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिल कपूर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
सत्र की शुरुआत में प्रो. आर. के. असरानी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा आगामी दो दिनों की कार्ययोजना और सम्मलेन के विभिन्न गतिविधियों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. एच. के. चौधरी ने कहा कि पशुपालन के बिना कृषि की कल्पना अधूरी है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रभाव हर क्षेत्र में बढ़ रहा है, ऐसे में कृषि और पशु चिकित्सा विज्ञान में भी उन्नत तकनीकों का समावेश शोध का प्रमुख विषय बन चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) की रक्षा करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि आत्मनिर्भर और स्वावलंबी कृषि मॉडल तैयार हो सके।
प्रो चौधरी ने किसानों से पारंपरिक प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान करते हुए वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे प्रकृति के सह-अस्तित्व को बनाए रखें। उन्होंने कहा, “हमें पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाना होगा, ताकि हमारी भावी पीढ़ी प्रकृति से सीख लेते हुए एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य का अनुभव कर सके।”
मुख्य अतिथि डॉ. हंसराज खन्ना ने अपने मुख्य अभिभाषण में कहा कि आज वैश्विक स्तर पर जलवायु संकट को देखते हुए स्मार्ट एग्रीकल्चर, जलवायु अनुकूल खेती और स्वस्थ पशुधन प्रबंधन पर विशेष ध्यान केंद्रित करना अपरिहार्य हो गया है। जब तक पशुधन स्वस्थ और उत्पादक नहीं होगा तथा खेती मौसम के अनुकूल नहीं होगी, तब तक एक सतत और आत्मनिर्भर भविष्य की बात नहीं की जा सकती।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. आर.के. अभिलाषी और प्रति-कुलाधिपति डॉ. एल.के. अभिलाषी ने सम्मेलन के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अभिलाषी विश्वविद्यालय जलवायु-स्मार्ट कृषि और पशुपालन संबंधी समाधानों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और अनुसंधान को प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होंने वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से ऐसी प्रभावी एवं व्यावहारिक कार्ययोजना विकसित करने का आह्वान किया, जिसे गांव-गांव तक लागू किया जा सके। उनके अनुसार, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक मॉडलों का क्रियान्वयन किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाएगा और सतत कृषि विकास की अवधारणा को वास्तविक रूप प्रदान करेगा।
प्रथम दिन आयोजित तकनीकी एवं मौखिक प्रस्तुति सत्रों में विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने विचार और शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए। इनमें डॉ. वीरेंद्र कुमार, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय; डॉ. राकेश राणा, CSIR–हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (IHBT), पालमपुर; डॉ. आर.एस. चंदेल, पूर्व विभागाध्यक्ष कीट विज्ञान विभाग कृषि विश्वविद्यालय; तथा डॉ. पंकज सूद, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर सहित अनेक प्रख्यात विशेषज्ञ शामिल रहे। विभिन्न विषयों पर हुई चर्चाओं ने जलवायु परिवर्तन, कृषि नवाचार, पशुधन स्वास्थ्य और सतत विकास के लिए बहुविषयक अनुसंधान की आवश्यकता को रेखांकित किया।
सम्मेलन में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, निदेशक और प्राध्यापक उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्थानीय जन-प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देते हुए ग्राम पंचायत चच्योट की प्रधान श्रीमती लीला देवी, उपप्रधान श्री पंकज, तथा वार्ड सदस्य श्रीमती रीना को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में सम्मानित एवं उपस्थित किया गया। अपने प्रथम सत्र के धन्यबाद संबोधन में अधिष्ठाता स्कूल ऑफ़ एग्रीकल्चर से प्रो.पी.सी. शर्मा ने अभिलाषी विश्वविद्यालय के प्रबंधन के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने मंच पर उपस्थित मुख्य अतिथि, प्रतिष्ठित मुख्य वक्ताओं, प्रतिष्ठित वक्ताओं तथा सोसाइटी फॉर एडवांसमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चरल एंड हॉर्टिकल्चरल साइंसेज से पधारे सभी विशिष्ट अतिथियों का उनके अमूल्य समय, दूरदर्शी मार्गदर्शन और प्रेरणादायी विचारों के लिए सहृदय धन्यवाद किया।
इसके साथ ही, उन्होंने सभागार में उपस्थित सभी युवा शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नए विचार और नवाचार ही इस सम्मेलन की वास्तविक शक्ति हैं। अंत में, उन्होंने आयोजन समिति के समस्त सदस्यों और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्रथम सत्र की औपचारिक समाप्ति की घोषणा की।
